
- BS6 ENGINE TECHNOLOGY
- BS6 ENGINE WORKING
- BS6 REGENERATION क्या है ? और कैसे करते है
- BS6 PHASE 2 क्या है ?
- DPF, SCR, & OBD 2 EXPLAINE.
1. परिचय :-
भारत में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने 1 अप्रैल 2020 को सभी वाहनों के हानिकरण उत्सर्जन एमिशन को कंट्रोल करने के लिए Bs 6 लागू किया गया था | आप सोचेंगे की Bs5 क्यों नहीं लाया उसकी जगह सीधे Bs6 लांच कर दिया इसकी वजह बहुत ज्यादा बढ़ती हुई हानिकरण उत्सर्जन एमिशन धुआ था | जो पर्यावरण के लिए हानिकारक हो रहा था, कारण पर्यावरण भी बचाव है और इंसानों के लिए भी उनके लक्स में या उनके शरीर में प्रॉब्लम कर रहा था [ जैसे – नाइट्रोजन ऑक्साइड और सल्फर ] जिसके कारण सीधे bs6 लॉन्च करना पड़ा |
2. Bs6 इंजन टेक्नॉलजी क्या है :-
Bs6 पेट्रोल और डीजल में सल्फर की मात्र केवल 10 PPM पार्ट्स प्रति मिलियन होती है जो इन्हें Bs4 फ्यूल की कंपैरिजन में 5 गुना अधिक बेटरऔर स्वच्छ बनाती है | जिसे भारत सरकार ने लागू किया है, सल्फर की कम मात्रा या सुनिश्चित करती है की कम विषैली गैस उत्सर्जन हो और emitions सिस्टम को कम करने वाली TECHONOLOGY बेहतर ढंग से काम करें | Bs6 का पूरा नाम भारत स्टेज 6 है |
3. BS4 और BS6 मे अंतर :-
| पैरामीटर | BS4 | BS6 |
| Nox { डीजल } | ज्यादा | लगभग 70% कम |
| PM { कण } | अधिक | बहुत कम |
| TECHNOLOGY | सिम्पल , सामान्य | ADVANCE |
| SENSOR | थोड़ा कम | अधिक |
| MILLEAGE | ठीक है | बेहतर /सतूलित |
| MRP. | सस्ती | थोड़ा अधिक |
| OBD | अनियवार्य नहीं | अनिवार्य { वास्तविक उत्सर्जन मनीटरिंग } |
| तकनीक/ इंजन | बेसिक egr सिस्टम | उन्नत scr ,dpf ,Lnt सिस्टम |
👉 इसका मतलब है की BS6 गड़िया ज्यादा अधिक क्लीन और अड्वान्स है |
4.BS6 का उद्देश्य :-
BS6 (भारत स्टेज 6) इंजन का मुख्य उद्देश्य वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करके हवा की गुणवत्ता में सुधार करना है। यह अत्यंत सख्त उत्सर्जन मानकों के माध्यम से नाइट्रोजन ऑक्साइड (NOx), कण पदार्थ (PM), और सल्फर जैसे हानिकारक तत्वों के उत्सर्जन को बीएस4 की तुलना में काफी कम करता है, जिससे पर्यावरण संरक्षण और बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित हो सके मुख्य उद्देश्य पदूषण (Pollution) को कम करना और पर्यावरण को सुरक्षित रखना है। भारत सरकार ने बढ़ते एयर पॉल्यूशन को देखते हुए BS4 के बाद सीधे BS6 नियमों को लागू किया था।
यहाँ BS6 इंजन के मुख्य उद्देश्यों और फायदों को आसान पॉइंट्स में समझाया गया है: 👇

1. वायु प्रदूषण को कम करना है , 2. ग्रीन हाउस गैस को कम करना है , 3. इंजन एफिसेन्सी को बढ़ाना है , 4. हेल्थ रिस्क को कम करना है , 5. इंटर्नेसनोल स्टैन्डर्ड अपनाना है , 6. सख्त प्रदूषण नियंत्रण: पेट्रोल में NOx उत्सर्जन में 25% और डीजल में 68% तक की कटौती करना , 7. सल्फर में कमी: BS6 ईंधन में सल्फर की मात्रा को काफी कम करना, जिससे इंजन का जीवन बढ़ता है , 8. उन्नत तकनीक: कार्बोरेटर की जगह इलेक्ट्रॉनिक फ्यूल इंजेक्शन (EFI) सिस्टम का उपयोग करना, जिससे बेहतर माइलेज और परफॉरमेंस मिले , 9. पर्यावरण स्थिरता: हानिकारक धुएं को कम करके स्वच्छ हवा सुनिश्चित करना , 10. एडवांस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल
BS6 इंजनों में प्रदूषण रोकने के लिए नई मशीनों का उपयोग किया गया है:
DPF (Diesel Particulate Filter): यह डीजल इंजन के धुंए से कालिख (Soot) को छान लेता है।
SCR (Selective Catalytic Reduction): इसमें AdBlue (Urea solution) का इस्तेमाल होता है, जो जहरीली गैसों को नाइट्रोजन और पानी में बदल देता है।
OBD (On-Board Diagnostics): अब इंजन में ऐसा सिस्टम होता है जो खुद चेक करता रहता है कि गाड़ी ज्यादा प्रदूषण तो नहीं कर रही। अगर कोई गड़बड़ी होती है, तो डैशबोर्ड पर लाइट जल जाती है , 11. हानिकारक गैसों में भारी कमी (Emission Control)
BS6 का सबसे बड़ा लक्ष्य इंजन से निकलने वाली जहरीली गैसों को कंट्रोल करना है:
Nitrogen Oxides (NOx): डीजल इंजनों में NOx के लेवल को लगभग 70% तक कम किया गया है।
Particulate Matter (PM): हवा में मिलने वाले बारीक धूल के कणों (PM 2.5) को 80% तक कम किया गया है, जिससे धुंआ बहुत कम निकलता है , 12. बेहतर फ्यूल क्वालिटी (Low Sulphur Fuel)
BS6 सिर्फ इंजन ही नहीं, बल्कि डीजल और पेट्रोल की क्वालिटी पर भी ध्यान देता है। BS6 ईंधन में सल्फर (Sulphur) की मात्रा बहुत कम (10 mg/kg) होती है, जबकि BS4 में यह 50 mg/kg थी। सल्फर कम होने से फेफड़ों की बीमारियों का खतरा कम होता है।
5. BS6 मे USE होने वाले प्रमुख TECHNOLOGY :-

- फ्यूल injections सिस्टम :- कार्बोरेटर की जगह इलेक्ट्रॉनिक फ्यूल इंजेक्शन का उपयोग किया जा रहा है, जो इंजन को सटीक मात्रा में ईंधन पहुंचाता है, जिससे प्रदूषण कम होता है। इससे फ्यूल की मात्रा बारीक तरीके से जलता है स्मोक कम बनता है गाड़ी में पावर और परफॉर्मेंस बढ़ती है पिकअप भी अच्छी तरह बढ़ती है |
- ECU { Engine Control Unit }:- ECU गाड़ी का दिमाग ब्रैन होता है यह सभी सेनसॉरो का डाटा लेकर इंजन को कंट्रोल करता है जिसके कारण फ्यूल और हवा का सही से मिश्रण हो पता है अगर इसमें फाल्ट आ जाए तो गाड़ी में बहुत सारे प्रॉब्लम आ जाएंगे आपके डैशबोर्ड मीटर में चेक इंजन लाइट जल जाएगा या गाड़ी स्टार्ट नहीं होगा माइलेज गिर जाएगी पिकअप कम हो जाएगा और कहीं तरह के प्रॉब्लम आएंगे |
- OBD 2 System Diagnostic:- यह सिस्टम गाड़ी के हेल्थ को मॉनिटरिंग करता है , जब से OBD 2 गाड़ियों में डायग्नोस्टिक सिस्टम आया है तब से गाड़ियों के जो प्रॉब्लम है वह बहुत जल्दीदूर हो जा रहा है जहां पर मैकेनिक को मैन्युअल चेक करना पड़ता था वहां स्कैनर से बहुत जल्दी काम आसान हो जा रहा है कुछ भी फॉल्ट आयाए तुरंत सॉल्व हो जा रहा है यह एक तरह का मैकेनिक का बहुत बड़ा ब्रह्मास्त्र है समझो
- DPF { Disel Particulate Filter }:- Dpf डीजल इंजन के एग्जास्ट सिस्टम का एक बहुत ही महत्वपूर्ण पार्ट होता है जो bs6 गाड़ियों में हानिकारक गैस प्रदूषण को काम करने के लिए लगाया जाता है या फिल्टर चन्नी का काम करता है जब डीजल इंजन चलता हैतो धुएं के साथ काले रंग के बारीक कार्बन के कण निकलते हैं जिन्हें सूटमांस कहा जाता है यह उन कणों को वातावरण में जाने से पहले ही अपने अंदर शौक लेता है इससे फायदा होता है किहमारी गाड़ी से काला धुआं निकलना बंद हो जाता है और साफ हवा रहती है | जब यह dpf भर जाता है तो रिजर्वेशन प्रक्रिया करना पड़ता है या सेल्फक्लीनिंग रिजर्वेशन खुद से ले लेता है अगर सूट मांस ज्यादा हो तो obd स्कैनर से रिजर्वेशन करना पड़ता है अगर dpf की लाइट जलती है तो गाड़ी में माइलेज और पावर दोनों काम हो जाता है |
- SCR Sytem { selective Catalylic Reductions }:- Bs6 डीजल इंजन की एक बहुत ही आधुनिक तकनीक है इसका मुख्य काम इंजन से निकलने वाली सबसे जहरीली गैस नाइट्रोजन ऑक्साइड नॉक्स को खत्म करना होता है जब इंजन के अंदर डीजल चलता है तो बहुत तेज गर्मी के कारण नॉक्स पैदा होती है जो पर्यावरण और सेहत के लिए बहुत ही हानिकारक है एससीआर इस हवा में मिलने से पहले ही न्यूट्रलाइज कर देता है अब यह काम कैसे करता है एससीआर अकेले काम नहीं करता इसके लिए ऐड ब्लू उरीया डी ई एफ डीजल एग्जास्ट फ्लूएड की जरूरत पड़ती है इसकी प्रक्रिया को नीचे दिए गए स्टेप्स में समझते हैं पहले ऐड ब्लू का छिड़काव जब इंजन से गर्म धुआं निकलता है तो scr यूनिट के पास एक नोजल लगा होता है जो धुएं पर ऐड ब्लू का स्प्रे करता है दूसरा केमिकल रिएक्शन एड ब्लू गम धुआ के साथ मिलकरअमोनियम nh3 में बदल जाता है तीसरा बदलाव जब यह अमोनिया और नॉक्स गैस एस सी आर के कैटालिस्ट के अंदर से गुजरते हैं तो एक रासायनिक प्रक्रिया होती है इसके बाद चौथ साफ हवा इस प्रक्रिया के बाद जहरेली नॉक्स गैस नाइट्रोजन n2 और वाटर वापुर h2o यानी बाप में बदल जाती है जो की बिल्कुल सुरक्षित होता है |
- EGR { Exhust Gas Recirculation }:- सिस्टम डीजल और पेट्रोल दोनों इंजनों में इस्तेमाल होने वाली एक बहुत ही महत्वपूर्ण तकनीक है। इसका मुख्य उद्देश्य इंजन से निकलने वाली Nitrogen Oxides (NOx) गैस को कम करना और इंजन के तापमान को कंट्रोल में रखना है। सरल शब्दों में कहें तो, EGR इंजन के धुंए के एक छोटे से हिस्से को दोबारा इंजन के अंदर भेजता है ताकि उसे फिर से जलाया जा सके और प्रदूषण कम हो।
- GPF { Gasoline Particulate Filter }:- यह पेट्रोल गाड़ियों मे होता है , इसका इसेतेमल सूक्ष्म कानों को रोकना होता है , पेट्रोल (Gasoline) इंजन वाली BS6 गाड़ियों में प्रदूषण कम करने की एक आधुनिक तकनीक है। जिस तरह डीजल इंजन में DPF होता है, ठीक उसी तरह पेट्रोल इंजन में GPF का इस्तेमाल किया जाता है। GPF का मुख्य कार्य (Main Function)
- पेट्रोल इंजन (खासकर GDI – Gasoline Direct Injection इंजन) जब चलता है, तो धुंए के साथ बहुत ही बारीक और अदृश्य कार्बन के कण निकलते हैं। GPF का काम: यह उन बारीक कणों को अपने अंदर फँसा लेता है, फायदा: इससे हवा साफ रहती है और BS6 के कड़े नियमों का पालन होता है।
6. BS6 PHASE 2 क्या है ? :-
BS6 का अड्वान्स वर्जन है THE रियल ड्राइविंग इमिशन पहले लैब मे टेस्ट होता था , और अब रोड पर भी टेस्ट होगा या होता है | BS6 Phase 2 भारत में लागू एक एडवांस एमिशन स्टैंडर्ड है, जो 1 अप्रैल 2023 से लागू हुआ। यह पहले से मौजूद BS6 (Phase 1) का अपग्रेडेड वर्जन है।
RDE के फायदे : रियल कंडिशन्स मे कम प्रदूषण , ज्यादा सटीक टेस्ट और जानकारी , बेहतर इंजन कंट्रोल |
RDE Norms क्या होते हैं?
👉 RDE (Real Driving Emissions) का मतलब है:
गाड़ी को रियल रोड पर चलाकर उसके प्रदूषण को मापना।
पहले क्या होता था?
गाड़ी को लैब में टेस्ट किया जाता था
फिक्स कंडीशन होती थी
अब क्या होता है?
ट्रैफिक, हाईवे, चढ़ाई, मौसम — सब में टेस्ट
रियल लाइफ ड्राइविंग में चेक
👉 इसलिए इसे ज्यादा सटीक और सख्त नियम माना जाता है।
7. BS6 इंजन कैसे काम करता है ? :-
BS6 इंजन के काम करने का तरीका पुराने इंजनों (BS4) के मुकाबले थोड़ा अलग और ज्यादा एडवांस है। इसका मुख्य फोकस इस बात पर होता है कि इंजन के अंदर ईंधन (Fuel) पूरी तरह से जले और बाहर धुंआ कम से कम निकले।
एयर + फ्यूल इंजन में जाता है
ECU इसे कंट्रोल करता है
combustion होता है
एग्जॉस्ट गैस निकलती है
DPF / SCR / EGR गैस को साफ करते हैं
साफ गैस बाहर निकलती है
👉 Result = कम प्रदूषण 🚫🌫️
BS6 के फायदे (Advantages) :-
✔️ 1. प्रदूषण में भारी कमी
NOx और PM काफी कम
✔️ 2. बेहतर माइलेज
Efficient combustion
✔️ 3. इंजन लाइफ बढ़ती है
एडवांस टेक्नोलॉजी
✔️ 4. हेल्थ बेनिफिट
साफ हवा
✔️ 5. इंटरनेशनल लेवल टेक्नोलॉजी
🔴 BS6 के नुकसान (Disadvantages)
❌ 1. गाड़ी महंगी
👉 ₹10,000 – ₹50,000 तक बढ़ोतरी
❌ 2. मेंटेनेंस ज्यादा
👉 DPF, SCR जैसे पार्ट्स महंगे
❌ 3. Low Quality Fuel से समस्या
👉 सही BS6 फ्यूल जरूरी
BS6 गाड़ियों में आम समस्याएं (Common Problems)
DPF चोक होना
AdBlue खत्म होना
Sensor Failure
Check Engine Light
Low Mileage Issue
👉 Solution:
नियमित सर्विस
सही ड्राइविंग
हाईवे ड्राइव (DPF साफ करने के लिए)
🧪 BS6 फ्यूल क्या है?
👉 BS6 फ्यूल में सल्फर बहुत कम होता है
👉 BS4 में: 50 ppm
👉 BS6 में: 10 ppm
👉 फायदा:
कम प्रदूषण
इंजन सेफ
🚗 BS6 गाड़ी कैसे पहचानें?
RC में लिखा होगा BS6
2020 के बाद की गाड़ियां
OBD पोर्ट मौजूद
AdBlue टैंक (डीजल में)
📊 ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर असर
🏭 कंपनियों पर प्रभाव
नई टेक्नोलॉजी लानी पड़ी
लागत बढ़ी
रिसर्च बढ़ा
👨🔧 मैकेनिक पर असर
स्किल बढ़ानी पड़ी
स्कैनर की जरूरत
👨👩👧👦 ग्राहकों पर असर
महंगी गाड़ी
लेकिन साफ हवा
🔮 भविष्य (Future of BS6)
👉 आने वाला समय होगा:
Electric Vehicles (EV)
Hybrid Vehicles
Hydrogen Fuel
👉 BS6 एक कदम है → Clean Mobility की तरफ
8. Conclusion (निष्कर्ष) :-
BS6 टेक्नोलॉजी भारत की ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव है। यह न केवल वाहनों को आधुनिक बनाती है बल्कि पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है।
हालांकि इसकी लागत और मेंटेनेंस थोड़ा ज्यादा है, लेकिन लंबे समय में यह हमारे लिए बेहतर साबित होगा।
👉 अगर आप नई गाड़ी खरीदने का सोच रहे हैं, तो BS6 टेक्नोलॉजी को समझना बहुत जरूरी है।